बुध कुंभ राशि में वक्री: जानें देश-दुनिया पर प्रभाव!

बुध कुंभ राशि में वक्री: इन राशियों पर टूट सकता है मुसीबतों का पहाड़!

बुध कुंभ राशि में वक्री: वैदिक ज्योतिष में बुध देव को एक महत्वपूर्ण ग्रह का दर्जा प्राप्त है जिनकी कुंडली में शुभ-अशुभ स्थिति जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करने का सामर्थ्य रखती है। नवग्रहों में बुध को “ग्रहों के युवराज” के नाम से जाना जाता है और कुंडली में इनकी मज़बूत स्थिति जातक को तेज़ बुद्धि और बेहतरीन संचार कौशल का आशीर्वाद देती है। वहीं, बुध ग्रह के अशुभ या दुर्बल अवस्था में होने पर जातक अपनी भावनाओं या बात को दूसरे के सामने नहीं रख पाता है। साथ ही, व्यक्ति को हकलाने की समस्या भी परेशान कर सकती है। अब जल्द ही बुध ग्रह कुंभ राशि में वक्री होने जा रहे हैं और ऐसे में, इनकी चाल में होने वाले बदलाव का असर संसार और समस्त राशियों पर दिखाई दे सकता है। 

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एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “बुध कुंभ राशि में वक्री” के बारे में समस्त जानकारी प्रदान करेगा। जैसे कि हम जानते हैं कि बुध ग्रह का संबंध बुद्धि, तर्क से है और यह वाणी को भी नियंत्रित करते हैं। कुंडली में बुध की शुभ स्थिति जहाँ आपको कई तरह के शुभ फल प्रदान करती है, वहीं इनकी दुर्बल अवस्था आपके जीवन को समस्याओं से भर देती है। इसी क्रम में, हमारा इस ब्लॉग में आपको बुध की वक्री चाल का आप पर प्रभाव और उनसे बचने के उपाय भी बताए जाएंगे। तो आइए बिना देर किए इस ब्लॉग की शुरुआत करते हैं और सबसे पहले नज़र डालते हैं बुध वक्री के समय और तिथि पर। 

बुध कुंभ राशि में वक्री: तिथि और समय 

ज्योतिष शास्त्र में बुध देव युवराज के नाम से विख्यात हैं जिन्हें देवताओं का दूत कहा जाता है। सामान्य रूप से बुध महाराज एक राशि में लगभग 23 से 27 दिनों तक रहते हैं और उसके बाद यह दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसी क्रम में, अब बुध ग्रह 26 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे। बता दें कि कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं और बुध इनके साथ तटस्थ संबंध रखते हैं। इसके अलावा, बुध देव कुंभ राशि में उदित, वक्री और अस्त भी होंगे। इसके परिणामस्वरूप, बुध का कुंभ राशि में वक्री होना संसार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

आगे बढ़ने से पहले आपको अवगत करवाते हैं कि आख़िर किसे कहते हैं ग्रह का वक्री होना। 

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बुध कुंभ राशि में वक्री: क्या होता है ग्रह का वक्री होना?

एस्ट्रोसेज एआई समय-समय पर अपने पाठकों को ग्रहों की दशा और उनके अर्थ से अवगत करवाता रहा है। अब जब बुध ग्रह कुंभ राशि में वक्री होने जा रहे हैं, तो हम यहाँ आपको बताने जा रहे हैं कि किसे कहते हैं ग्रह का वक्री होना। बता दें कि ज्योतिष में किसी ग्रह का वक्री होना उस घटना को कहा जाता है जब कोई ग्रह अपने परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ने के बजाय उल्टी चाल यानी कि पीछे की तरफ चलना शुरू कर देता है और इसी अवस्था को ग्रह का वक्री होना कहा जाता है।

शायद ही आप जानते होंगे कि वास्तव में ग्रह कभी भी वक्री नहीं होते हैं, परंतु उन्हें दूर से देखने पर उल्टा चलता हुआ प्रतीत होता है। ज्योतिष में ग्रह की वक्री अवस्था को अशुभ माना जाता है और इस दौरान किसी विशेष ग्रह से मिलने वाले परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।

बुध कुंभ राशि में वक्री: बुध वक्री का महत्व और प्रभाव

अगर हम बात करें वक्री शब्द की, तो इस शब्द को लेकर कई तरह के मिथक हैं। अधिकतर लोग यह मान लेते हैं कि ग्रहों की वक्री अवस्था अशुभ होती है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। किसी भी ग्रह की वक्री चाल जातक को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के परिणाम दे सकती है। हालाँकि, कोई ग्रह अपनी वक्री अवस्था में आपको किस तरह के परिणाम देगा, यह पूरी तरह से कुंडली में उस ग्रह की शुभ-अशुभ स्थिति पर निर्भर करता है। 

जब बुध ग्रह वक्री होते हैं, तो व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता पर अपना असर डाल सकते हैं। साथ ही, आपकी वाणी में कठोरता या रूखापन आ सकता है। बुध की वक्री अवस्था के दौरान मोबाइल, लैपटॉप, स्पीकर और कैमरा जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में खराबी आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कागजी कामकाज और दस्तावेज़ों में गलतियाँ होने का योग बनता है, वहीं काम से जुड़ी यात्राएँ भी सफल न हो पाने की आशंका रहती हैं।

आइए अब आपको रूबरू करवाते हैं बुध ग्रह के ज्योतिषीय महत्व से। 

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बुध कुंभ राशि में वक्री: ज्योतिषीय दृष्टि से बुध ग्रह 

  • नवग्रहों में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है इसलिए इनकी स्थिति कुंडली में अहम हो जाती है। सौर मंडल में यह सूर्य के सबसे निकट स्थित हैं। 
  • बता दें कि बुध देव की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। यह न तो स्त्री हैं और न ही पुरुष, बल्कि इन्हें द्विस्वभाव ग्रह माना जाता है। 
  • सरल शब्दों में कहें, तो कुंडली में बुध महाराज जिस ग्रह के साथ बैठे होते है, उसी ग्रह के अनुसार जातक को परिणाम प्रदान करते हैं। 
  • यदि आपकी कुंडली में बुध देव शुभ ग्रहों जैसे गुरु, शुक्र और चंद्रमा के साथ मौजूद होते हैं, तो आपको कार्यों में शुभ फल प्राप्त होंगे। 
  • लेकिन, इनकी स्थिति कुंडली में अशुभ या पापी ग्रह के साथ जैसे राहु-केतु के साथ होने पर आपको नकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होगी। 
  • अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध महाराज की स्थिति बलवान होती है, तो आपको तेज दिमाग, बेहतरीन संचार कौशल और व्यापार में सफलता का आशीर्वाद मिलता है। 
  • साथ ही, यह जातक किसी भी नई जानकारी को जल्द ग्रहण करते हैं और इनकी दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता मज़बूत होती है।
  • वहीं, जिन जातकों की कुंडली में बुध देव कमजोर, दुर्बल या पापी ग्रहों से पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को भ्रम, असमंजस, मानसिक अस्थिरता या संचार में गलती जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 
  • दुर्बल बुध आपकी निर्णय लेने की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। व्यक्ति को दूसरों से बात करने और लेखन में भी कठिनाइ का अनुभव हो सकता है।

धार्मिक दृष्टि से बुध ग्रह का महत्व 

बुध ग्रह को सिर्फ ज्योतिष में ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त नहीं है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बुध को विशेष माना जाता है। बुध देव के पिता चंद्र और माता तारा देवी हैं। सनातन धर्म में बुध महाराज को सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। बुद्धि के दाता भगवान गणेश और श्रीहरि के अवतार श्रीकृष्ण को इनका इष्ट देव माना जाता है इसलिए इनकी पूजा-अर्चना करने से बुध देव प्रसन्न होते हैं और आपको उनकी कृपा प्राप्त होती है। बात करें बुध ग्रह के स्वभाव की, तो धार्मिक ग्रंथों में बुध को कोमल और शांत स्वभाव का बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इनकी वाणी को कोमल और मधुर कहा गया है इसलिए इनके शब्दों से दूसरे आसानी से मोहित हो जाते हैं। 

अब हम आपको बताने जा रहे हैं कुंडली में बुध ग्रह कैसे आपको जीवन में प्रभावित करते हैं। 

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मानव जीवन को कैसे प्रभावित करता है बुध ग्रह?

कुंडली में बुध ग्रह का शुभ और अशुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करत हैं जिनके बारे में हम नीचे बात करेंगे। 

बुध का आर्थिक जीवन पर प्रभाव: आर्थिक जीवन के लिए बुध महाराज की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि बुध देव कागज़ी कार्यों और धन से जुड़े मामलों को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, अगर बुध किसी राशि में वक्री होते हैं, तब जातकों को धन से जुड़े फैसले लेने और बिना सोचे-समझे खरीदारी करने से बचना चाहिए। वक्री बुध के दौरान व्यक्ति को धन से जुड़े मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि आप छलकपट और धोखे के शिकार हो सकते है।

बुध का करियर पर प्रभाव: जैसे कि हम जानते हैं कि बुध महाराज नवग्रहों के युवराज कहे जाते हैं और ऐसे में, इनकी स्थिति व प्रभाव कुंडली में विशेष हो जाता है। इसी क्रम में, जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध शुभ होते हैं, उसे व्यापार में सफलता हासिल करने की अपार क्षमता, सोच-विचार करने और सही फैसले लेने दर्शाती है। बुध ग्रह का मज़बूत होना जातक को डाटा, लेखन और नेटवर्किंग के क्षेत्र में कामयाबी दिलाने का काम करती है जबकि इनका नकारात्मक प्रभाव दूसरों के सामने अपनी बात रखने या अपने काम को समय पर पूरा करने की क्षमता को प्रभावित करता है।

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वैवाहिक जीवन पर बुध का प्रभाव: सामान्य रूप से वक्री अवस्था शुभ नहीं मानी जाती है। इसी क्रम में, बुध की वक्री अवस्था विवाह योग्य जातकों के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो विवाह करना चाहते हैं। वहीं, जब आप विवाह के बंधन में बंध जाते हैं, तो बुध देव की कृपा से जीवनसाथी के साथ आपसी तालमेल और संवाद कौशल मजबूत होता है। इसके परिणामस्वरूप आप दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को भली-भांति निभाते हैं। 

प्रेम जीवन पर बुध का प्रभाव: जब बुध देव मार्गी अवस्था में होते हैं, तब जातक का संचार कौशल या दूसरों से बात करने की क्षमता अत्यंत प्रभावशाली रहती है। ऐसे लोगों का प्रेम जीवन अपने पार्टनर के साथ हँसी-खुशी और सौहार्द से भरा रहता है और वह एक-दूसरे से खुलकर बात करते हुए नज़र आते हैं। हालांकि, बुध देव की वक्री अवस्था के दौरान रिश्तों में जीवनसाथी के साथ बहस और गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, इस समय आप दोनों अनावश्यक वाद-विवाद में भी उलझ सकते हैं।

चलिए अब आपको अवगत करवाते हैं कुंडली में कमज़ोर बुध के संकेतों से।

कमज़ोर बुध कैसे करता है आपको परेशान

  • बुध की कमज़ोर अवस्था आपको बालों का झड़ना और नाख़ूनों का टूटना जैसी समस्याएं देती हैं।
  • परिवार की महिला रिश्तेदारों जैसे बुआ, बहन, साली और मौसी के साथ रिश्ते बिगड़ने लगते हैं जिसकी वजह अशुभ बुध का प्रभाव होता है।
  • व्यक्ति पर बुध का नकारात्मक प्रभाव होने से जातक हकलाने लगता है और अपनी बात को सही तरीके से दूसरों के सामने नहीं रख पाता है।
  • बुध की अशुभता की वजह से दोस्तों के साथ मतभेद और वाद-विवाद भी जन्म लेने लगते हैं जिससे आपके संबंध ख़राब होने लगते हैं। 
  • करियर और व्यापार को भी बुध देव की दुर्बल अवस्था प्रभावित करती है। ऐसे में, आपको करियर में असफलता प्राप्त होती है जबकि व्यापार में आपको हानि का सामना करना पड़ता है।

आइए अब जान लेते हैं बुध को प्रसन्न करने के उपायों से। 

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बुध कुंभ राशि में वक्री: सरल एवं प्रभावी उपाय 

  • बुध को कुंडली में मज़बूत करने के लिए बुधवार के दिन हरे रंग की वस्तुओं का दान करें और गाय को हरा चारा खिलाएं। 
  • बुध देव का आशीर्वाद पाने के लिए बुध ग्रह की नियमित रूप से पूजा करें और इसके बाद बुध स्तोत्र का पाठ करें। 
  • बुध ग्रह को प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन व्रत करें और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। साथ ही, गणेश जी को मूंग के लड्डू प्रसाद के रूप में भोग लगाएं। 
  • कुंडली में बुध देव को बलवान बनाने के लिए आप बुध का पन्ना रत्न अंगूठी में जड़वाकर धारण करें। हालांकि, ऐसा करने से पूर्व किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। 
  • कार्यों में सकारात्मक परिणाम पाने के लिए बुधवार के दिन बुध ग्रह की पूजा करें और इस दौरान “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें। 

कालसर्प दोष रिपोर्ट – काल सर्प योग कैलकुलेटर

बुध कुंभ राशि में वक्री: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए बुध देव आपके तीसरे और छठे भाव के स्‍वामी हैं जो अब आपके…(विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए बुध महाराज आपके दूसरे और पांचवे भाव… (विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों की कुंडली में पहले और चौथे भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों की कुंडली में बुध महाराज आपके तीसरे और बारहवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए बुध देव आपके दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। अब यह… (विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए बुध महाराज आपके पहले और दसवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि के जातकों की कुंडली में बुध ग्रह आपके नौवें और बारहवें भाव… (विस्तार से पढ़ें) 

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध देव आपके आठवें और ग्यारहवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि 

धनु राशि के जातकों के लिए बुध महाराज आपके सातवें भाव और दसवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए बुध महाराज आपके छठे और नौवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए बुध ग्रह आपके पांचवें और आठवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए बुध ग्रह आपके चौथे और सातवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बुध कुंभ राशि में वक्री कब होंगे?

बुध देव 26 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे।

कुंभ राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र में कुंभ राशि के अधिपति देव शनि ग्रह हैं। 

बुध ग्रह किसके कारक हैं?

ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार कौशल का कारक ग्रह माना जाता है।